मशरूम की उत्पादन कैसे करे पूरी जानकारी, पढ़िए कब और कैसे कर सकते हैं खेती – Mushroom Ki Kheti Kaise Kare in Hindi

मशरूम एक उत्पाद है, जिसे एक कमरे में भी उगाया जा सकता है, इसको उगाकर किसान अपनी आय दोगुनी ही नहीं चार गुनी कर सकते हैं…

https://www.gaonconnection.com/kheti-kisani/complete-information-on-mushroom-production-when-and-how-can-farming-oysters-mushroom-button-mushroom-41941

मशरूम एक उत्पाद है, जिसे एक कमरे में भी उगाया जा सकता है, इसको उगाकर किसान अपनी आय दोगुनी ही नहीं चार गुनी कर सकते हैं…

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 मशरूम एक उत्पाद है, जिसे एक कमरे में भी उगाया जा सकता है, इसको उगाकर किसान अपनी आय दोगुनी ही नहीं चार गुनी कर सकते हैं|

आज हम आप को बता रहे हैं मशरूम की खेती  कैसे कीजाती है इसके लिए आप को
कितना खर्चा करना पड़ेगा , मशरूम की खेती के लिए किन किन  चीजों की आप को
जरुरत पड़ेगी, कैसी जगहे होनी चैहिये ये सब हम आप को पूरा बताएँगे और  आप
कहा इसकी मारकेरिंग करेंगे और कहा इसको बचेंगे , इसकी पूरी जानकारी हम आप को
देंगे 
आप मशरूम की खेती केर के पुरे  साल में  9 से 10 फसल काट सकते हैं
और अच्छा मुनाफा कमा सक्ते हैं

आइये जानते हैं मशरूम की खेती कैसे शुरू करें
|

अगर
आप  अतिरिक्त
धन
कमाकर
अपना
एक
नया
व्यापार
खोलना
चाहते
है,
तो
मशरूम
की
खेती
करना
आपके
लिए
काफी
फायदेमंद
हो
सकता
है.
हालांकि
इसमें
अच्छी
पैदावार
पाने
के
लिए
आपको
बहुत
ख्याल
रखना
होता
है,
अगर
आप
इसमें
मेहनत
करते
हैं
तो
फायदा
भी
काफी
ज्यादा
होता
है.
अभी
हाल
में
ही
उत्तर
प्रदेश,
हरियाणा
और
राजस्थान
जैसे
राज्यों
में
इसकी
खेती
आरम्भ
हो
चुकी
है.
इतना
ही
नहीं
हिमाचल
प्रदेश,
जम्मू
कश्मीर
जैसे
ठंड़े
राज्यों
में
भी
मशरूम
की
खेती
की
जाने
लगी
है.
पूरे
विश्व
में
एशिया
एवं
अफ्रीका
के
क्षेत्रों
में
इसकी  काफी मांग बढ़ी है 

इसके
बीज
की
कीमत
लगभग 75
रुपए
प्रति
किलोग्राम से सुरु होती हैं , जो
कि
ब्रांड
और
किस्म
के
अनुसार
बदलती
रहती
है.
इसलिए
आपको
पहले
यह
तय
करना
होगा,
कि
आप
किस
किस्म
की
मशरूम
को
उगाना
चाहते
है
यहाँ पर आप तीन
तरह
के
मशरूम
की खेती
कर
सकते
हैं 

1.     
बटन
मशरूम 2.
ढिंगरी
मशरूम (ऑयस्टर
मशरुम) 3.
दूधिया
मशरूम (मिल्की

बटन मशरूम के फायदे

मशरूम में प्रोटीन, विटामिन D,फाइबर, अमीनो एसिड, जर्मेनियम, सेलेनियम और
जिंक जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं. यही नहीं यह नैचुरल एंटी ऑक्‍सीडेंट होने
के साथ ही एंटीवायरल गुणों से भरपूर है. चीन में तो इसे औषध‍ि का दर्जा दिया
गया है. वहीं रोम के लोग मशरूम को भगवान का खाना मानते हैं. मशरूम खाने के कई
फायदे हैं जैसे की
1. दिल के लिए फायदेमंद
2. हड्डियों को मज़बूत बनाए
3. कैंसर से बचाए
4. सेक्स पावर बढ़ाए
5. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए

क्या है मिल्की मशरूम

यह गर्म मौसम में तैयार होने वाली एकमात्र मशरूम है जोकि स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन है। सफेद रंग की इस मशरूम के उत्पादन के लिए रसायन खाद का कहीं इस्तेमाल नही होता। भले ही बटन मशरूम के मुकाबले में इसका स्वाद कुछ कम है। मगर गर्मियों में यही मशरूम पैदा होती है  बड़े बड़े होटलों में बिकती है। मिल्की मशरूम लगाने वालों को अभी से बीज की बुकिंग करा देनी चाहिए।

 
ढिंगरी मशरूम (ऑयस्टर मशरुम)
रोग रोधक,  स्वादिष्ट तथा विशेष महक के कारण आधुनिक युग का एक महत्वपूर्ण खाद्य आहार हैयह विश्व में उगाये जाने वाले मशरूमों में ये तीशरे स्थान पे है  तथा भारत में इसका दूसरा स्थान हैइस मशरूम को खाने से शरीर में ग्लूकोज सहन करने की क्षमता बढती है जिससे मधुमेह रोगियों के उपचार में अत्यन्त लाभकारी पाया गया हैजल में घुलनशील कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति के कारण इसमें कैंसर रोधी गुण पाये जाते है साथ ही उत्सर्जन तन्त्र सम्बन्धी रोगों एवं कोलेस्ट्राल को कम करने में भी सहायक है.
  

आइये जानते हैं ऑयस्टर
मशरुम
उगाने
की
पूरी
जानकारी..


ऑयस्टर
मशरूम
की
खेती
बड़ी
आसान
और
सस्ती
है।
इसमें
दूसरे
मशरूम
की
तुलना
में
औषधीय
गुण
भी
अधिक
होते
हैं।
दिल्ली,
कलकत्ता,
मुम्बई
एवं
चेन्नई
जैसे
महानगरों
में
इसकी
बड़ी
माँग
है।
इसीलिये
विगत
तीन
वर्षों
में
इसके
उत्पादन
में 10
गुना
वृद्धि
हुई
है।
तमिलनाडु
और
उड़ीसा
में
तो
यह
गाँवगाँव
में
बिकता
है।
कर्नाटक
राज्य
में
भी
इसकी
खपत
काफी
है।
महाराष्ट्र,
मध्य
प्रदेश,
पश्चिम
बंगाल,
केरल,
राजस्थान
और
गुजरात
जैसे
राज्यों
में
भी
ओईस्टर
मशरूम
की
कृषि
लोकप्रिय
हो
रही
है।

मशरूम
की
खेती के
लिए
सात
दिन
पहले
ही
मशरूम
के
बीज
लें।  इसके
उत्पादन
के
लिए
भूसा,
पॉलीबैग,
कार्बेंडाजिम,
फॉर्मेलिन
और मशरूम
बीज
की
जरूरत
होती
है।
दस
किलो
भूसे
के
लिए
एक
किलो
मशरूम
बीज
की
जरूरत
होती
है,

सबसे पहले आप दस
किलो
भूसे
को

100 लीटर
पानी
में
भिगोया
जाता
है,
इसके
लिए 150
मिली.
फार्मलिन,
सात
ग्राम
कॉर्बेंडाजिन
को
पानी
में
घोलकर
इसमें
दस
किलो
भूसा
डुबोकर
उसका
शोधन
किया
जाता
है।
भूसा
भिगोने
के
बाद
लगभग
बारह
घंटे
यानि
अगर
सुबह
फैलाते
हैं
तो
शाम
को
और
शाम
को
फैलाते
हैं
तो
सुबह
निकाल
लें,
इसके
बाद
भूसे
को
किसी
जालीदार
बैग
में
भरकर
या
फिर
चारपाई
पर
फैला
देते
हैं,
जिससे
अतिरिक्त
पानी
निकल
जाता
है।

इसके
बाद
एक
किलो
सूखे
भूसे
को
एक
बैग
में
भरा
जाता
है,
एक
बैग
में
तीन
लेयर
लगानी
होती
है,
एक
लेयर
लगाने
के
बाद
उसमें
स्पॉन
की
किनारेकिनारे
रखकर
उसपर
फिर
भूसा
रखा
जाता
है,
इस
तरह
से
एक
बैग
में
तीन
लेयर
लगानी
होती
है।

बैग
में
स्पॉन
लगाने
के
बाद
पंद्रह
दिनों
में  मशरूम की
सफेदसफेद
खूटियां
निकलने
लगती
हैं,
मशरूम
बैग के  चारों
तरफ
निकलने
लगता
है।
इस
मशरूम
में
सबसे
अच्छी
बात ये होती
है की इसे
किसान
सुखाकर
भी
बेच
सकते
हैं,
इसका
स्वाद
भी
तीनों
मशरूम
में
सबसे
बेहतर
होता
है।  ये तो हुई ऑयस्टर मशरुम उगने की विधि 

 



आइये जानते हैं बटन
मशरूम
की
खेती कैसे करते हैं 

बटन
मशरूम
निम्न
तापमान
वाले
क्षेत्रों
में
अधिक
उगाया
जाता
है।
लेकिन
अब
ग्रीन
हाउस
तकनीक
द्वारा
यह
हर
जगह
उगाया
जा
सकता
है।
सरकार
द्वारा
बटन
मशरूम
की
खेती
के
प्रचारप्रसार
को
भरपूर
प्रोत्साहन
दिया
जा
रहा
है।
अब
इसका
उत्पादन 20
किग्रा.
प्रति
वर्गमीटर
में की जा सकती है उत्तर
प्रदेश
में
इसका
अच्छा
उत्पादन
हो
रहा
है।

 बटन
मशरूम
मशरूम
के
बीज
को
स्पान
कहतें
हैं।
बीज
की
गुणवत्ता
का
उत्पादन
पर
बहुत
असर
होता
है,
इसलिए
खुम्बी
का
बीज
या
स्पान

अच्छी
भरोसेमंद
दुकान
से
ही
लेना
चाहिए।
बीज
एक
माह
से
अधिक
पुराना
भी
नही
होना
चाहिए।

बीज
की
मात्रा
कम्पोस्
खाद
के
वजन
के 
2  से 2.5
प्रतिशत
के
बराबर
लें।
बीज
को
पेटी
में
भरी
खाद  पर
बिखेर
दें
तथा
उस
पर 2
से
तीन
सेमी
मोटी खाद की
एक
परत
और
चढ़ा
दें।
अथवा
पहले
पेटी
में भूसे की
तीन
इंच
मोटी
परत
लगाऐं
और
उसपर
बीज
की
आधी
मात्रा
बिखेर
दे।
उस
पर
फिर
से
तीन
इंच
मोटी खाद की
परत
बिछा
दें
और
बाकी
बचे
बीज
उस
पर
बिखेर
दें।
इस
पर खाद की
एक
पतली
परत
और
बिछा
दें।


बुवाई
के
बाद
पेटी
या
थैलियों
को
वहां
रख
दें,
जहां 
पर
उत्पादन
करना
हो।
इन
पर
पुराने
अखबार
बिछाकर
पानी
से
भिगो
दें।
कमरे
में
पर्याप्
नमी
बनाने
के
लिए
कमरे
के
फर्श

दीवारों
पर
भी
पानी
छिड़कते
रहें।
इस
समय
कमरे
का
तापमान 22
से 26
डिग्री
सेंन्टीग्रेड
और
नमी 80
से 85
प्रतिशत
के
बीच
होनी
चाहिए।
अगले 15
से 20
दिनों
में
खुम्बी
का
कवक
जाल
पूरी
तरह
से
कम्पोस्
में
फैल
जाएगा।
इन
दिनों
खुम्बी
को
ताजा
हवा
नही
चाहिए
इसलिए
कमरे
को
बंद
ही
रखें।

बटन
मशरूम
की
तुड़ाई बिज़ लगाने के 30-40 दिन
बाद  कम्पोस्
के
ऊपर
मशरूम
के
सफेद
घुंडिया
देने
लगती
हैं,
जो
अगले
चारपांच
दिनों
में
बढ़ने
लगती
हैं,
जिसको 
घूमाकर
धीरे
से
तोड़ना
चाहिए,
इसे
चाकू
से
भी
काट
सकते
हैं।



अब आती है बचने की बात ,  तो मशरूम
कहां
बेच
सकते
है

मशरूम
की
मांग
कई
जगहों
पर
होती
है,
आज के दौर में इसका उपयोग अधिकतर घरो में हो रहा है  इसको
बेचने
के
लिए
उपयुक्त
स्थानों
में
होटल,
दवाएं
बनाने
वाली
कंपनियां
आदि
आते
हैं.
इसके
अलावा
मशरूम
का
उपयोग
अधिकतर
फ़ास्ट
फ़ूड
और
चाइनीज
खाने
में
किया
जाता
है.
इसके
अन्य
लाभकारी
गुणों
के
कारण
इसको
मेडिकल
के
क्षेत्र
में
भी
उपयोग
किया
जाता
है.
इतना
ही
नहीं
इसका
निर्यात
एवं
आयात
भी
कई
देशों
में
किया
जाता
है,
अर्थात
इसको
बेचने
के
लिए
बहुत
से
क्षेत्र
मौजूद
है.

मशरूम की खेती से जुड़े कुछ सवाल एवं उनके
जबाव

क्या मशरूम मैदानी क्षेत्रों में उगाई
जा सकती है?
 हां, मशरूम कहीं भी पैदा की जा सकती है बशर्ते वहां
का तापमान तथा आर्द्रता जरूरत के अनुसार हो।
मशरूम के लिए कौन सी जलवायु उपयुक्त है?
मशरूम  एक इंडोर फसल है। फसल के फलनकाय के समय तापमान
14-18°सेल्सियस व आर्द्रता 85 प्रतिषत रखी जाती है।
उर्वरक की आवश्यकता ?
 गेहूँ/पुआल की तूड़ी/मुर्गी की बीठ/गेहूँ की चैकर,
यूरिया तथा जिप्सम का मिश्रण तैयार करके तैयार खाद पर मशरूम  उगाई जाती है। खुम्ब का बीज (स्पॅन) गेहूँ के दानों
से तैयार किया जाता है।
मशरूम  की खेती के लिए कौन सी सामान्य आवष्यकता पड़ती है?
मशरूम  एक इंडोर फसल होने के कारण इसके लिए नियंत्रित तापमान
और आर्द्रता की आवष्यता पड़ती है। (तापमान 14-18°सेल्सियस व आर्द्रता 85 प्रतिषत रखी
जाती है। )
शाकाहारी अथवा मांसाहारी?
मशरूम शाकाहारी
है। मशरूम पौष्टिक होते हैं, प्रोटीन से भरपूर होते हैं, रेषा व फोलिक एसिड सामग्री
होती है जो आमतौर पर सब्जियों व अमीनो एसिड में नहीं होती व मनुष्य के खाने योग्य अन्न
में अनुपस्थित रहती है। यह भी पढ़ें   सिलिकॉन:
पौधों की वृद्धि, विकास, तथा उपज के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं 
बाजार क्षमता क्या है?
मशरूम  अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं व अब इसकी बाजार संभावनाएं
बढ़ गई है। श्वेत बटन खुम्ब ताजे व डिब्बा बंद अथवा इसके सूप और आचार इत्यादि उत्पाद
तैयार कर बेचे जा सकते हैं। ढींगरी मशरूम  सूखाकर
भी बेचे जा सकते हैं।
क्या मशरूम में मक्खियों से कैसे छुटकारा
पाया जा सकता है?
आप स्क्रीनिंग
जाल दरवाजे और कृत्रिम सांस के साथ नायलोन अथवा लोहे की जाली (35 से 40 आकार की जाली),
पीले रंग का प्रकाष व मिलाथीन अथवा दीवारों पर साईपरमेथरीन की स्प्रे से मक्खियों छुटकारा
पा सकते हैं।
प्रशिक्षण कहाँ मिलेगा ?
आप खुम्ब
उत्पादन तकनीकी प्रषिक्षण देश के विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय से प्राप्त
कर सकते हैं। कौन-कौन से उत्पाद मशरूम से तैयार किए जा सकते हैं? आप मशरूम  से आचार, सूप पाउडर, केंडी, बिस्कुट, बड़िया, मुरब्बा
इत्यादि उत्पाद तैयार कर सकते हैं। 
क्या सरकार मशरूम  उत्पादन इकाई लगाने के लिए वित्तीय सहायता/सब्सिडी
प्रदान करती है?
नबार्ड,
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड और बैंक मशरूम  उत्पादन
इकाई, स्पाॅन उत्पादन इकाई और खाद बनाने की इकाई लगाने के लिए ऋण प्रदान करते हैं।
खाने की मशरूम कितने प्रकार की होती है?
श्वेत बटन
खुम्ब, ढींगरी खुम्ब, काला चनपड़ा मशरूम , स्ट्रोफेरिया खुम्ब, दुधिया मशरूम , षिटाके
इत्यादि कुछ खाने की मषरूमें हैं जो कि कृत्रिम रूप से उगाई जा सकती है। खाने वाली
गुच्छी मशरूम  हिमाचल प्रदेष, जम्मू व कष्मीर
तथा उत्तराखंड के ऊँचें पहाड़ों से एकत्रित की जाती है ।
क्या मशरूम में बीमारियां लगती हैं?
हां, मशरूम  में विभिन्न प्रकार की बीमारियां लगती है। मशरूम
की कुछ मुख्य बीमारियां गीला बुलबुला, षुष्क बुलबुला, कोब बेब व मोल्ड (हरा, पीला,
भूरा) है।


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