मात्र 5 हज़ार रुपये, लेकिन आइडिया कमाल का था, सालाना 360 करोड़ की हो रही है कमाई

गम हो या खुशी के पल हो फूल हर अंदाज को बयां करने का सबसे आसान और खुबसूरत जरिया होते हैं। ताजे फूलों में खुशी को दोगुना और गम को हल्का करने की ताकत होती है। इन्हीं फूलों के छोटे से गुलदस्ते में कारोबारी संभावनाओं को देखा बिहार के विकास गुटगुटिया ने। महज 5 हज़ार रुपये की रकम से शुरुआत कर देश के फ्लोरिकल्चर इंडस्ट्री में क्रांति लाते हुए अंतराष्ट्रीय स्तर की एक नामचीन ब्रांड स्थापित करने वाले विकास आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कायदे से देखें तो भारत की फ्लोरिकल्चर इंडस्ट्री की सालाना कुल ग्रोथ 30 फीसदी की रफ्तार से भी तेज हो रही है। वहीं इंडस्ट्री बॉडी एसोचैम की माने तो आने वाले कुछ वर्षों में इस इंडस्ट्री का मार्केट कैप 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। ऐसे स्थिति में इस क्षेत्र में कारोबार की बड़ी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आज हम बात कर रहे हैं एक छोटे फ्लोरिस्ट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में में पहचान बना चुके बड़े ब्रांड फर्न्स एन पेटल्स की आधारशिला रखने वाले विकास गुटगुटिया की सफलता के बारे में। पूर्वी बिहार के एक छोटे से गांव विद्यासागर में एक मध्यम-वर्गीय परिवार में जन्मे विकास ने स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई पश्चिम बंगाल से की। पढ़ाई के दौरान विकास अपने चाचा के फूलों की दुकान पर मदद भी किया करते थे और यहीं से उन्होंने व्यापार करने की बारीकियों को सीखा।
पढ़ाई खत्म होने के बाद दो साल उन्होंने मुंबई व दिल्ली में रोजगार व व्यापार की संभावना खोजी और फिर साल 1994 में 5 हजार रूपये की शुरूआती पूंजी से साउथ एक्सटेंशन दिल्ली में पहली बार फूलों की एयर कंडीशन शॉप खोली। हालांकि उस दौर में देश के भीतर फूलों से संबंधित व्यापार में ज्यादा तरक्की के आसार नहीं थे लेकिन फिर भी विकास ने अपना सफ़र जारी रखा। संयोग से उन्हें एक भागीदार मिल गया जिसने इस बिजनेस में 2.5 लाख रुपए निवेश किए। भागीदारी लंबी नहीं चली और 9 साल तक उन्हें मुनाफ़े का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान फूलों का निर्यात करके उन्होंने रिटेलिंग को किसी तरह जारी रखी।
इस असंगठित सेक्टर में जितने भी फ्लोरिस्ट मौजूद थे उनसे हटकर बेहतर सर्विस, फूलों की वेराइटी और आकर्षक फूलों की सजावट पर विकास ने जोर दिया। और विकास का गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देने की उनकी कोशिश कामयाब हुई। इसी दौरान ताज पैलेस होटल में एक भव्य शादी के लिए उन्हें फूलों की सप्लाय का ऑर्डर मिला और इस तरह बिज़नेस के एक नए रास्ते खुले। साथ ही विकास ने कारोबार में नयापन लाने हेतु फुलों के गुलदस्ते के अलावा फुलों के साथ चॉकलेट्स, सॉफ्ट टॉइज, केक्स, गिफ्ट हैंपर्स जैसे प्रोडक्ट के साथ अपनी रेंज बढ़ाते गये।
करीबन 7 साल तक कारोबार को चलाने के बाद उन्होंने अपने रिटेल व्यापार को देशव्यापी बनाने की योजना बनाई और फर्न्स एन पेटल्स बुटीक्स की फ्रेंचाइजी देना शुरू किया। फ्रेंचाइजी के लिए उन्होंने 10-12 लाख रुपये के निवेश और शोरूम के लिए 200-300 वर्गफीट की जगह का न्यूनतम मापदंड रखा। इस निवेश में कंपनी ब्रैंड नेम, इंफ्रास्ट्रक्चरल सपोर्ट, डिजाइन और तकनीकी जानकारियां, फूलों के सजावट की ट्रेनिंग के साथ स्टोर चलाने के लिए लगने वाली इंवेटरीज जैसे फूल, एक्सेसरीज और गिफ्ट आइटम मुहैया करवाती है।
आज फर्न्स एन पेटल्स की चेन्नई, बैंगलोर, दिल्ली, मुंबई, कोयंबटूर, आगरा, इलाहाबाद सहित देश के 93 शहरों में 240 फ्रेंचाइज स्टोर फैली हुई है। इतना ही नहीं फर्न्स एन पेटल्स आज भारत में सबसे बड़ा फूल और उपहार खरीदने वाली श्रृंखला है जिसका सालाना टर्नओवर 360 करोड़ के पार है। आज यह सिर्फ भारत में ही कारोबार नहीं कर रही बल्कि एक वैश्विक ब्रांड बन चुकी है।  
फूलों के संगठित रिटेल व्यापार में सबसे बड़े उद्यमी के रूप में जाना जाने वाले विकास की सफलता से हमें काफी कुछ सीखने को मिलता है। विकास जब फूलों का कारोबार शुरू किये थे तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वे देश के सफल कारोबारियों की सूची में शुमार करेंगें। अपने आइडिया के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने हमेशा कुछ नया करने को सोचा और सफल हुए। 

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