मार्केटिंग कैसे करें व 2023 के मार्केटिंग के विभिन्न बेहतरीन तरीके – 2023 Top Best Marketing Strategy Tips in Hindi

आज के समय में पैसे खर्च कर व्यापार स्टार्ट करना तो बहुत आसान काम है, मुश्किल है तो आपकी सोच को लोगों तक पहुँचना और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना. मार्केटिंग और प्रमोशन ही वह चीजें है, जिसके द्वारा आप अपना प्रोडक्ट और सेवाएँ लोगों तक पहुंचा सकते है और लोगों को इसके संबंध में जानकारी दे सकते है.

वैसे तो मार्केटिंग के कई तरीके उपलब्ध है, परंतु आपको अपना व्यवसाय उसका आकार और प्रकार देखकर सही तारीका चुनने की आवश्यकता होती है. और कई हद तक आपकी मार्केटिंग का तरीका आपके बजट और आपके प्रोडक्ट या सेवा पर भी निर्भर करता है.

मार्केटिंग क्या है ? – what is Marketing ?

मुख्यतः मार्केटिंग वह तरीका है जिसके द्वारा लोग अपनी जरूरतों और इच्छाओ की पूर्ति के लिए आपके व्यापार से परिचित होते है. हमारे आसपास कई ऐसे उदाहरण मौजूद होते है, जिनमें लोगों के पास एक बहुत अच्छा बिज़नेस प्लान होता है, परंतु उसे सही मार्केटिंग ना मिल पाने की वजह से वह लोगों तक नहीं पहुँच पाता और असफल हो जाता है.

आपको अपने व्यापार को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आप अपने दायरे से बाहर आकर लोगों तक अपनी सोच को पहुंचाये और अपने लिए एक ग्राहकों का आधार तैयार करे. एडवरटाइजिंग, सेलिंग और प्रमोशन मार्केटिंग का ही एक भाग है, परंतु मार्केटिंग केवल इन तक सिमित नहीं इससे और भी बहुत कुछ जुड़ा हुआ है.

मार्केटिंग के 6 पी (6 P’s of Marketing ) :

जब आप अपने प्रोडक्ट या सेवा को लांच करते है तो आपको मुख्यत 6 बातों को ध्यान रखना पड़ता है, इन्हें मार्केटिंग के 6 पी के नाम से जाना जाता है. यह 6 पी निम्न है:

  1. प्रोडक्ट
  2. प्राइस
  3. प्लेस
  4. प्रमोशन
  5. पीपल
  6. प्रोसेस
  • प्रोडक्ट : प्रोडक्ट से हमारा यहाँ तात्पर्य उस वस्तु या सेवा से है, जो आप अपने ग्राहकों को प्रदान करते है. जब आप अपने व्यापार के रूप में सेवा का चयन करते है तो आपको इसकी पैकेजिंग और लेबलिंग जैसे फीचर्स की चिंता करने की आवश्यक्ता नहीं होती, परंतु इसके लिए आपको ब्रांडिंग और क्वालिटी का विशेष ध्यान रखना होता है. वही अगर आप कोई प्रोडक्ट अपने ग्राहकों तक पहुँचाना चाहते है, तो आपको इसकी पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग और क्वालिटी सभी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होगा. इसके अलावा आपको अपनी प्रोडक्ट सेफ्टी का भी बहुत ध्यान रखना होता है.

  • प्राइस : प्राइस किसी भी वस्तु या सेवा की वह कीमत होती है, जो कि ग्राहक वस्तु या सेवा के बदले में प्रदान करता है. अपनी किसी भी वस्तु या सेवा का प्राइस तय करते वक्त आपको मार्केट में उपलब्ध अन्य प्रतिस्पर्धियों का ध्यान रखना पड़ता है. परंतु यदि आपका प्रोडक्ट बेस्ट और यूनिक है तो आप अपने मन माफिक प्रॉफिट कमा सकते है. कॉम्पेटेटिव प्राइस का यह फंडा कुछ लग्सरी प्रोडक्ट के लिए भी फेल हो जाता है. जैसे ऑडी और मर्सिडीज जैसी कारो की कीमत मार्केट में उपलब्ध अन्य करो की अपेक्षा बहुत ज्यादा है. परंतु इन्हें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि इनका टार्गेट मार्केट ही अलग है. परंतु अगर आप कोई नया प्रोडक्ट लांच कर रहें है, तो आपको मार्केट को ध्यान में रखना होगा.

  • प्लेस : प्लेस वह जगह है, जहाँ से आपके ग्राहक आपका प्रोडक्ट या सर्विस खरीदते है. इसमे मार्केटिंग के सभी चैनल भी सम्मिलित होते है. मार्कटिंग में निम्न चैनल शामिल है.

  1. ग्राहक को डायरेक्ट रिटेलिंग : इस तरीके से आप डायरेक्ट स्टोर या अन्य आउटलेट खोलकर अपनी सेवा या प्रोडक्ट ग्राहकों को ऑफर कर सकते है. इस स्थिति में प्रोडक्ट या सर्विस की प्राइस अपेक्षाकृत कम होती है, क्योंकि इस स्थिति में मध्य के चैनलों में लगने वाले खर्चे की बचत होती है और यह प्रॉफिट व्यापारी को स्वयं मिलता है.

  1. वस्तुओं को होलसेलर के माध्यम से बेचना : होलसेलर वह बीच की कड़ी है, जिसके माध्यम से वस्तु एक व्यक्ति से होकर अन्य तक पहुँचती है. जब आप अपने व्यापार का दायरा बढ़ा लेते है, तो आपको होलसेलर की आवश्यक्ता पड़ती है.

  1. फ्रेंचाइजी : फ्रेंचाइजी आज के समय में बहुत जरूरी है, पहले केवल वस्तुओं के लिए होलसेलर के द्वारा व्यापार का दायरा बढ़ाया जा सकता था. परंतु अब विशेष ट्रेनिंग और ट्रिक्स के जरिये सेवाओं का भी दायरा बढ़ाया जाना संभव हुआ है. जावेद हविब्स, मेक्डोनल्स फ्रेंचाइजी, पिज़्ज़ा हट आदि कई सफल फ्रेंचायजी के उदाहरण हमारे सामने मौजूद है.

  1. रिटेल ऑनलाइन : आजकल ऑनलाइन मार्केटिंग बहुत चलन में है, इसके द्वारा आप अपनी वस्तु या सेवा डायरेक्ट ऑनलाइन तरीके से अपने कस्टमर को प्रदान कर सकते है. आजकल विशेषकर वस्तुओं के लिए यह बहुत ही सफल है, इसकी वजह से ग्राहक के पास ज्यादा वैरायटी और चॉइस मौजूद हुई है.

  1. इन सब के अलावा आप अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर, कंसलटेंट या एजेंट का भी उपयोग कर सकतें है.

  • प्रमोशन : प्रमोशन मार्केटिंग का सबसे अहम् हिस्सा है, इसी के सहायता से आप अपना प्रोडक्ट या सर्विस कस्टमर्स तक पहुंचाते है. आजकल हमारे पास प्रमोशन के कई तरीकें जैसे वेबसाइट, सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग, इ-न्यूज़ लेटर, नेटवर्किंग, पंपलेट, टीवी, रेडिओ, प्रिंट एडवरटाइजिंग, वर्ड ऑफ़ माउथ एडवरटाइजिंग, लायल्टी एंड रिवॉर्ड प्रोग्राम, कोल्ड कालिंग, आदि. इन तरीको का उपयोग कर आप अपने बिज़नेस को बेहतर पहचान दिलवा सकते है.

  • पीपल : यहाँ पीपल से हमारा तात्पर्य आपके ग्राहकों से ना होकर आपके सप्लायर, डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, स्टैक होल्डर और आपके एम्प्लाइज से है. यह सभी लोग आपके व्यापार में आपकी टीम का एक हिस्सा होते है और आपके व्यापार की सफलता में सभी का बराबर का हिस्सा होता है.

  • प्रोसेस : आपके बिज़नेस की सफलता के लिए कस्टमर सर्विस और मार्केटिंग प्रोसेस बहुत ही अहम् हिस्सा है. मार्केटिंग प्रोसेस में समय पर नया स्टोक आर्डर करना. इसे समय पर ग्राहक तक पहुँचाना, आपके ग्राहक से फीडबैक एकत्रित करना और सेल्स और फाइनेंशियल रिपोर्ट का रेगुलर एनालिसिस करना आदि शामिल है. अगर इनमे से अगर कुछ भी गड़बड़ा जाता है तो आपका मार्केट और बिज़नेस दोनों प्रभावित होते है .

जब भी आप कोई नया बिज़नेस स्टार्ट करते है और उसके लिए मार्केटिंग के तरीके सोचते है तो वह सारे तरीके इन्हीं 6 चीजों के आस पास होकर जाते है. परंतु हर किसी के दिमाग में हमेशा यह बात रहती है कि अपने बिज़नेस की मार्केटिंग कैसे करे? उसके तरीके क्या होंगे? आपकी इसी समस्या का हल निकालने के लिए मार्केटिंग के कुछ तरीके हम आपको दे रहें है जो आपके काम आयेंगे.

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